70 वर्ष की उम्र में जगी शिक्षा की नई रोशनी — लालती देवी की प्रेरक कहानी
शिव नाडर फाउंडेशन की शिक्षा प्लस (Shiksha Plus) पहल के अंतर्गत जन मित्र न्यास द्वारा संचालित प्रौढ़ शिक्षा केंद्र में महिलाएँ उत्साहपूर्वक पढ़ाई करती हुईं। यह पहल ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की नई राह खोल रही है।
लालती देवी, पत्नी श्री ललईराम गोंड, कहार समुदाय से आती हैं। उनका पूरा जीवन संघर्ष, कठिन परिश्रम और त्याग की कहानी रहा है। बचपन से ही परिस्थितियों ने उन्हें जिम्मेदारियों के बोझ तले दबा दिया था। बड़े घरों में मजदूरी करते हुए उनका बचपन बीत गया, लेकिन उनके मन में एक छोटी-सी चाह हमेशा जीवित रही — पढ़ने और लिखने की चाह।
जब वह अपने आसपास की लड़कियों को साफ-सुथरे कपड़ों में, हाथों में किताबें लिए स्कूल जाते देखती थीं, तो उनका मन भी तड़प उठता था। वे अक्सर सोचतीं — “काश मैं भी पढ़ पाती, काश मैं भी स्कूल जा पाती।” परंतु गरीबी, दूरी और सामाजिक परिस्थितियों ने उनके इस सपने को जन्म लेते ही रोक दिया।
समय बीतता गया। लालती देवी कभी स्कूल नहीं जा सकीं, न ही शिक्षा का अनुभव कर पाईं। मात्र 15 वर्ष की आयु में उनका विवाह हो गया और वे गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों में पूरी तरह समर्पित हो गईं। परिवार, मेहनत और संघर्ष के बीच उन्होंने यह मान लिया कि शिक्षा शायद उनके भाग्य में नहीं है।
देखते ही देखते 70 वर्ष गुजर गए।
लेकिन जीवन हमेशा उम्मीद का एक दरवाज़ा खुला रखता है।
यह प्रश्न नहीं, बल्कि एक अधूरे सपने की पुकार थी।
आज लालती देवी नियमित रूप से कक्षा में आती हैं, पूरे मन से पढ़ाई करती हैं और अक्षरों से अपनी नई पहचान बना रही हैं। अब वे अपना नाम लिख लेती हैं, शब्द पहचानती हैं और आत्मविश्वास के साथ मुस्कुराती हैं। शिक्षा ने उनके जीवन में केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि सम्मान, आत्मविश्वास और एक नई खुशी भर दी है।
जो सपना दशकों तक उनके मन में दबा रहा, आज वह साकार हो रहा है।
उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि अवसर मिलने पर हर जीवन बदल सकता है। शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान नहीं देती — यह आत्मसम्मान जगाती है, व्यक्तित्व को सशक्त बनाती है और जीवन में नई दिशा देती है।
लालती देवी आज केवल एक शिक्षार्थी नहीं हैं, बल्कि उन हजारों लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जिन्होंने कभी यह मान लिया था कि अब बहुत देर हो चुकी है।


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